Monday, May 29, 2017

दर्द बिन ज़िंदगी नहीं होती

दर्द जिसकी दवा नहीं होती,
ज़िंदगी फ़िर सजा नहीं होती।

चाँद आगोश में छुपा जब हो,
नींद भी नींद है नहीं होती।

ज़िंदगी साथ में गुज़र पाती,
चाँद की चांदनी नहीं रोती।

कुछ तो कह कर जो गये होते,
तस्कीने दिल कुछ हुई होती।


दर्द हर दिल का बाशिंदा है,
दर्द बिन ज़िंदगी नहीं होती।

...©कैलाश शर्मा 

15 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  2. दर्द न हो तो जिंदगी क्या है इसका अहसास नहीं होता
    जिंदगी में दर्द सबको मिलता है ये दीगर बात है किसी को कम किसी को ज्यादा
    बहुत अच्छी विचार प्रस्तुति

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  3. दर्द ही अहसास कराता है हमें ज़िंदगी का ।
    ख़ूबसूरत रचना ।

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  4. दर्द हर दिल का बाशिंदा है,
    दर्द बिन ज़िंदगी नहीं होती।
    ये दर्द भी न हर बार नये लिबास में आकर चौंका देता है ....

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  5. बेहतरीन पंक्तियाँ..

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  6. ज़िंदगी साथ में गुज़र पाती,
    चाँद की चांदनी नहीं रोती।

    कुछ तो कह कर जो गये होते,
    तस्कीने दिल कुछ हुई होती।
    सटीक और बेहतरीन पंक्तियाँ

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  7. दर्द बिना ज़िंदगी नहि होती ...
    बहुत ही लाजवाब और सटीक शेर हैं ... समय पे खरे उतरते ...

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  8. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा आज गुरूवार (01-06-2017) को
    "देखो मेरा पागलपन" (चर्चा अंक-2637)
    पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  9. आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" में लिंक की गई है http://rakeshkirachanay.blogspot.in/2017/06/22.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

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  10. बहुत ही सुन्दरी....
    वाह!!!

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  11. कुछ तो कह कर जो गये होते,
    तस्कीने दिल कुछ हुई होती।

    वाह्ह ,आदरणीय ,बहुत ख़ूब ! सुन्दर अभिव्यक्ति आभार। "एकलव्य"

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  12. बहुत सुन्दर रचना..... आभार
    मेरे ब्लॉग की नई रचना पर आपके विचारों का इन्तजार।

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