Thursday, November 28, 2013

तलाश अस्तित्व की

तलाश करो स्वयं
अपने स्वयं का अस्तित्व 
अपने ही अन्दर
न भागो अपने आप से,
तुम्हारा अपना स्वत्व ही 
तुम्हारा मित्र या शत्रु,
प्रज्वलित होती अग्नि 
अच्छाई या बुराई की
स्वयं अपने अंतस में,
व्यर्थ है दोष देना

किसी बाहरी शक्ति को।

दिखाता रास्ता अपना ही 'मैं'
आगे बढ़ने का जीवन राह में।


....कैलाश शर्मा

37 comments:

  1. सर बहुत बढ़िया व उत्कृष्ट रचना , धन्यवाद
    नया प्रकाशन --: तेरा साथ हो , फिर कैसी तनहाई

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  2. शब्दशः सत्या एवं सार्थक कहती सुंदर रचना ...!!

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  3. यह मैं ही तो सारे फसाद कि जड़ बन जाता है कभी-कभी और कभी समस्या का हल भी...वाकई यह मैं बहुत ज़रूरी है।

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  4. मैं ही शब्द में सम्पूर्ण सच्चाई है..
    सही - गलत है बहुत ही बेहतरीन सार्थक रचना..
    :-)

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  5. मैं ही सर्वशक्तिमान हूँ .....हमारे ही अंदर अच्छा बुरा सब कुछ है.... सुंदर भाव ....!!

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  6. संवेदना से भरी अद्भूत

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  7. प्रिय ब्लागर
    आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर Hindi Blog`s Reader , हिंदी ब्लाग रीडरका शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं welcome to Hindi blog reader

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  8. आत्मचिंतन को प्रेरित करती रचना. अति सुन्दर.

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  9. इस तलाश में कई भटक भी जाते हैं...राह बड़ी विकट है...

    गहन भाव..

    सादर
    अनु

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  10. bas yahi bhav to meri prerak hai ki satya, astitva ya swa-anubhuti kirane ke dukan me nhi apne hi vyaktigat makan me milti hai. Jab ham antas ki yatra karte hain... Baki sab to bas yoon hi chalta rahta hai....

    Sadhuvad...

    Einstein

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  11. http://hindibloggerscaupala.blogspot.in/ के शुक्रवारीय अंक २९/११/२०१३ में आपकी इस रचना को शामिल किया गया हैं कृपया अवलोकन हेतु पधारे धन्यवाद

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  12. बस तलाश मैं ही कई बार खो जाता है अस्तित्व

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  13. अपने स्वयं का अस्तित्व
    अपने ही अन्दर

    .. aur kya likhun..!
    namn aapko sirji !

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  14. अंतर्मुख होकर यह काम करना अति कठिन -ऋषि मुनि भी असमर्थ
    नई पोस्ट तुम

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  15. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार आदरणीय-

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  16. बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ....

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  17. बहुत सही और सुंदर बात !

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  18. दिखाता रास्ता अपना ही 'मैं'
    आगे बढ़ने का जीवन राह में।bahut sundar

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  19. आत्‍मविश्‍लेषण के लिए अग्रसर करती पंक्तियां।

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  20. गहन जीवन दर्शन की सार्थक एवँ सशक्त अभिव्यक्ति ! बहुत सुंदर !

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  21. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (30-11-2013) "सहमा-सहमा हर इक चेहरा" “चर्चामंच : चर्चा अंक - 1447” पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

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  22. कल 30/11/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  23. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!

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  24. This comment has been removed by the author.

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  25. बहुत सुंदर उत्कृष्ट रचना ....!
    ==================
    नई पोस्ट-: चुनाव आया...

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  26. बहुत सुंदर उत्कृष्ट प्रस्तुति ....!
    ==================
    नई पोस्ट-: चुनाव आया...

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  27. बहुत सुन्दर दार्शनिक भाव लिए रचना ..

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  28. बिलकुल सही बाहरी सतह पर नहीं जीवन के गहरे अर्थ तो भीतरी "मैं' में हैं |

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  29. व्यर्थ है दोष देना
    किसी बाहरी शक्ति को।
    purntah sahmat ......

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  30. मन को स्वयं से साम्य स्थापित करना होता है।

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  31. तलाश करो स्वयं
    अपने स्वयं का अस्तित्व
    अपने ही अन्दर
    न भागो अपने आप से,
    तुम्हारा अपना स्वत्व ही
    तुम्हारा मित्र या शत्रु, truly said

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  32. खुद की ईमानदार पहचान और अपने पे भरोसा कर के जीवन की राह मिलती है ...

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  33. स्वयं की तलाश स्वयं में .... बहुत सुंदर भाव ।

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